मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुक्तक

” बार बार आती है मुझको मधुर यादें बचपन की,
गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी ,
निश्चिंत खेलना खाना फिरना निर्भय स्वच्छंद,
कैसे भूला जा सकता है बचपन का अतुलित आनंद “

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