मुक्तक · Reading time: 1 minute

कर्म फल

सपने ने मुझसे कहा पाने की सदा तमन्ना रख
परिश्रम हर्ष से बोला, प्राणी! मन को न अनमना रख
पुस्तक करे इशारा, देर-सवेर मिलेगा कर्म फल
दिल भी तुरंत बोल उठा सब्र का न कोरा पन्ना रख।

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