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मुक्तक

दिल का वो एक कोना, अब तक पडा़ है खाली
पत्ते हैं झड़ गए सब, सूनी पडी़ है डाली
मुमकिन नहीं तुम्हारी, यादों को भूल जाना
तुम बिन है सूनी होली, सूनी ही थी दिवाली ।
By : MUKESH PANDEY

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Mukeshkumar PANDEY
Mukeshkumar PANDEY
Ahmedabad
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Hi,I am a Teacher Of Biology,Born in Ahmedabad (Gujarat).I am a nature lover,i have great...
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