Feb 4, 2018 · मुक्तक
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मुक्तक

है चाहत उस मुकाम की जहाँ कोई कमी न हो!
ख्वाब हों पलकों में अश्कों की कोई नमी न हो!
हर तरफ फैली हुई हो रोशनी उम्मीदों की,
सुख की मीनारें हों मगर दुःख की सरज़मीं न हो!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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MITHILESH RAI
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