मुक्तक

मन में छुपे हुए कुछ राज़ अभी गहरे हैं
पँख पसारते परिंदों की उड़ानों पर पहरे हैं
ना मालुम सी बंदिशें हैं शब्दों पर जाने क्यों
अधरों पर रह रहकर खामोशी के पहरे हैं।।।
कामनी गुप्ता ***

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I am kamni gupta from jammu . writing is my hobby. Sanjha sangreh.... Sahodri sopan-2...
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