Skip to content

मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

December 6, 2017

कबतक देखता रहूँ तुमको देखकर?
कबतक सोचता रहूँ तुमको सोचकर?
हर साँस गुजरती है मेरे जिस्म की,
मेरे लबों की राह से दर्द बनकर!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Share this:
Author
MITHILESH RAI
#महादेव
Recommended for you