कविता · Reading time: 1 minute

मुक्तक

लगा दे घाव पर मरहम , दिवाना आज है कोई
कसकते लब हँसी ला दे , तराना साज है कोई
गुमशुदा हो भटकते जो , फिरे आतंक के तम में
जुदा रूहें मिला दे पल , बता वह राज है कोई

29 Views
Like
3 Posts · 105 Views
You may also like:
Loading...