.
Skip to content

मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

November 14, 2017

जब से लबों पे आया है तेरा नाम फिर से!
जैसे लबों पे आया है कोई जाम फिर से!
तेरी याद बंध गयी है साँसों की डोर से,
मुझको तरसाती हुई आयी है शाम फिर से!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Author
MITHILESH RAI
Recommended Posts
मुक्तक
जरूरत एक छोटी सी जीने को सब क्यों होती है ? ? ? ? ? ? ? हरपल उनके दीदार की ख्वाहिश अब क्यों होती... Read more
मुक्तक
आज कैसा सवाल आया है उन अमीरों पे काल आया है। नोट जिनके करीब हैं ज्यादा सीर उनके बवाल आया है।। भाऊराव महंत "भाऊ"
मुक्तक :-- आज मेरे ख़त का जवाब आया है !!
मुक्तक :-- आज मेरे ख़त का जवाब आया है ! मात्रा भार -- 2122 2122 2122 आज मेरे ख़त का जवाब आया है ! महबूब... Read more
मुक्तक
इसतरह से जागी है तेरी कामना! जाँम को लबों से हो जैसे थामना! बर्फ सी पिघल रही हैं हसरतें मेरी, आग से ख्वाबों का हो... Read more