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मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

October 11, 2017

आरजू हालात की मोहताज नहीं होती है!
ख्वाहिशों में लफ्जों की आवाज नहीं होती है!
जब रोक देती है कदमों को तकदीरे-मंजिल,
हर आदमी की कोशिश आगाज नहीं होती है!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Author
MITHILESH RAI
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