मुक्तक · Reading time: 1 minute

जीवन

जीवन यज्ञशाला, परिश्रम की आहुतियाँ जरूरी
रहो कर्मरत ,सब सपने और ख़्वाहिशें हो पूरी
गीता का ज्ञान याद रखो , कंटक मार्ग हो सुलभ
समस्याएं मिट जायेंगी, फिर न कोई मजबूरी।

44 Views
Like
56 Posts · 2.9k Views
You may also like:
Loading...