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मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

September 29, 2017

तुमको देखकर मेरा दिल मचलता है!
तुमको सोचकर मेरा दिल बहलता है!
कैसे मैं लगाऊँ जख्मों पर बंदिशें?
मुझको गमें-ख्याल दिन रात कुचलता है!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Author
MITHILESH RAI
#महादेव
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