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मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

September 25, 2017

यादों की करवट से लकीर सी बन जाती है!
दिल में तरंगों की तस्वीर सी बन जाती है!
जब भी आ जाता है सैलाब तमन्नाओं का,
दर्द की कड़ियों की जंजीर सी बन जाती है!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Author
MITHILESH RAI
#महादेव
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