Skip to content

मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

September 20, 2017

तेरी यादों की तन्हाई से डर जाता हूँ!
तेरी चाहत की परछाई से डर जाता हूँ!
टूट गये हैं ख्वाब सभी तेरी रुसवाई से,
तेरी जुल्फ की अंगड़ाई से डर जाता हूँ!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Share this:
Author
MITHILESH RAI
#महादेव
Recommended for you