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मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

September 18, 2017

अब तो मंजिलों के भी दाम हो गये हैं!
रिश्ते जिन्दगी के नीलाम हो गये हैं!
दर्द की लकीरें तैरती हैं अश्कों में,
अब तो जख्मों के कई नाम हो गये हैं!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Author
MITHILESH RAI
#महादेव
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