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मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

September 16, 2017

शाम की तन्हाई में खामोशी आ रही है!
ख्वाबों और ख्यालों की सरगोशी आ रही है!
मुमकिन नहीं है रोकना यादों के कदमों को,
दिल में तेरे प्यार की मदहोशी आ रही है!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Author
MITHILESH RAI
#महादेव
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