साहस

उम्मीद की किरण टिमटिमाती थी टूटे सितारे में
बेचारी बन न जीना चाहती, ज़िन्दगी उधारे में
हौसलों के सोपान से चढ़ी छूने को वो आकाश
पग को ही कर बना डाला,जिंदगी जी न गुज़ारे में

19 Views
poet and story writer
You may also like: