Jun 24, 2016 · मुक्तक
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साहस

उम्मीद की किरण टिमटिमाती थी टूटे सितारे में
बेचारी बन न जीना चाहती, ज़िन्दगी उधारे में
हौसलों के सोपान से चढ़ी छूने को वो आकाश
पग को ही कर बना डाला,जिंदगी जी न गुज़ारे में

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Sharda Madra
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