मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुक्तक

आज भी तेरे लिए हम यार बैठे हैं!
तेरी चाहत में गिरफ्तार बैठे हैं!
कोई डर नहीं है जुल्मों के दौर का,
हर जख्म के लिए हम तैयार बैठे हैं!

मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

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