मुक्तक · Reading time: 1 minute

रंग-रंगोली

हुरियारिन रंग डाले हुरियारे मन भाई होली
घुमा-घुमा लट्ठ मार रही, करती हंसी-ठिठोली
प्रेम पगे रंग लगे जोश से बजे ढोल मृदंग
हृदय के भीतर छा गई खुशियों की रंग रंगोली

30 Views
Like
56 Posts · 2.9k Views
You may also like:
Loading...