May 19, 2016 · मुक्तक
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मुक्तक

उडी है नींद आँखों से, हुआ अब चैन भी है गुम,
चमन में आज दिल के, तितलियाँ चाहत की हैं गुमसुम।
चली जाएंगी सांसे भी, तुम्हारे साथ ही साजन,
गिरह में बात अच्छे से, यही बस बांध लेना तुम।

दीपशिखा सागर-

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Deepshika Sagar
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