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मजधार मे नैया (मुक्तक)

********* मुक्तक *********
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जलमग्न हैं धराये विकल जिन्दगी है
आई ये कैसी प्रभु मुश्किल घड़ी है,
कहाँ कोई जाये अब आसरा है किसका
तुम्हीं हो सहारा विकट परिस्थिति है।

हरो नाथ मुश्किल करो पार बेड़ा
विपदा जो आई सहारा अब तेरा,
अब ना प्रभुजी चित्त से उतारो
हरो स्वामी विपदा करो पार बेड़ा।।

मजधार में है अब जीवन की नैया
तुम्ही हो सहारा तुम्ही हो खेवईया,
नहीं कोई दुजा अब दिखता है भगवन
दुखियों के दुख को हरो तुम कन्हैया।।
©®पं.संजीव शुक्ल “सचिन”
960335952
16/8/2017

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पं.संजीव शुक्ल
पं.संजीव शुक्ल "सचिन"
नरकटियागंज (प.चम्पारण)
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D/O/B- 07/01/1976 मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक...