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मुक्तक

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

मुक्तक

August 4, 2017

मुक्तक
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जहाँ इंसान बिकता है वहाँ किसका ठिकाना है।
फ़रेबी बात उल्फ़त में यहाँ करता ज़माना है।
समझ कर कीमती मुझको लगादीं बोलियाँ मेरी-
सिसकती आबरू कहती यही मेरा फ़साना है।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”

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Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more

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