Jun 24, 2016 · मुक्तक
Reading time: 1 minute

वृक्ष

आनन फानन में मैं चली गई इक कानन में
दृश्य सुन्दर, पवन संगीत बजा इन कानन में
कटते रहे यदि वृक्ष तो क्या होगा इस जीवन का
न वन्यजीवन, न वनस्पतियाँ, गहन विषय मनन में।

1 View
Copy link to share
Sharda Madra
56 Posts · 1.4k Views
poet and story writer View full profile
You may also like: