मुक्तक · Reading time: 1 minute

वृक्ष

आनन फानन में मैं चली गई इक कानन में
दृश्य सुन्दर, पवन संगीत बजा इन कानन में
कटते रहे यदि वृक्ष तो क्या होगा इस जीवन का
न वन्यजीवन, न वनस्पतियाँ, गहन विषय मनन में।

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