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मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

July 24, 2017

मैं इत्तेफाक से गुनाह कर बैठा हूँ!
तेरे रुखसार पर निगाह कर बैठा हूँ!
शामों-सहर रहता हूँ बेचैन इस कदर,
तेरे लिए जिन्दगी तबाह कर बैठा हूँ!

मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

Author
MITHILESH RAI
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