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मुक्तक

रागिनी गर्ग

रागिनी गर्ग

मुक्तक

July 16, 2017

………….शब्द चूड़ियाँ…………

पैरों में पायल ,हाथों में चूडियाँ…
युवतियों को लगने लगीं अब बेड़ियाँ…
खो जायेगी यह खनखनाहट इनकी ..
संस्कृति को गर न समझेंगी बेटियाँ

सुहागन के हाथों में चूड़ियाँ सजती हैं
खनखन की मधुर आवाज कर जब बजती हैं
एहसास कराती हैं सुहागन होने का
कुछ तो इनकी खनक सुनने को तरसती है
रागिनी गर्ग

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रागिनी गर्ग
मैं रागिनी गर्ग न कोई कवि हूँ न कोई लेखिका एक हाउस वाइफ हूँ| लिखने में मेरी रुचि है| मेरी कोई रचना किसी भी साहित्य में प्रकाशित नहीं है| फेसबुक की पोस्ट पर कमेंट करती रहती थी| लोगों को पसंद... Read more
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