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मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

July 10, 2017

जब वादों की जश्ने-रात होती है!
ख्वाबों की नजरों से बात होती है!
ढूंढती है सब्र को मेरी जिन्दगी,
जब भी यादों की बरसात होती है!

मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

Author
MITHILESH RAI
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