.
Skip to content

मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

July 8, 2017

मेरे ख्यालों में सिर्फ तेरी यादें हैं!
जिगर में गूँजती दर्द की फरियादें हैं!
खोया सा रहता हूँ तेरे इरादों में,
दिल की तस्वीर में टूटती मुरादें हैं!

मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

Author
MITHILESH RAI
Recommended Posts
मुक्तक
मुक्तक - कौन यह कहता है कि ख्वाब तो झूठे होते हैं । इनसे ही तो पथ, जीवन के अनूठे होते हैं । साकार हो... Read more
मुक्तक (जान)
मुक्तक (जान) ये जान जान कर जान गया ,ये जान तो मेरी जान नहीं जिस जान के खातिर जान है ये, इसमें उस जैसी शान... Read more
मुक्तक (जान)
मुक्तक (जान) ये जान जान कर जान गया ,ये जान तो मेरी जान नहीं जिस जान के खातिर जान है ये, इसमें उस जैसी शान... Read more
मुक्तक
शीर्षक मुक्तक - किरण- ज्योति, प्रभा, रश्मि, दीप्ति, मरीचि। “मुक्तक” भारती धरा अलौकिक है न्यारी है लालिमा भोर भाए किरण दुलारी है ब्रम्ह्पूत्र सिंधु नर्मदा... Read more