Jun 24, 2016 · मुक्तक
Reading time: 1 minute

गाहे-बगाहे

अनुबंध में बंध कुछ चाहे कुछ अनचाहे
झेलने पड़ते वे सभी गाहे – बगाहे
पग-पग समझोते का ही है नाम ज़िन्दगी
मानव मन उसे दिल से चाहे या न चाहे।
^^^^^^शारदा मदरा^^^^^

11 Views
Copy link to share
Sharda Madra
56 Posts · 2.3k Views
poet and story writer View full profile
You may also like: