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* मुक्तक *

Neelam Ji

Neelam Ji

मुक्तक

July 5, 2017

अंत ही आरम्भ है नई शुरुआत का ।
चलते रहो बेख़ौफ़ डर किस बात का ।।
जीवन मिला है तो मौत भी निश्चित है ।
अंत से घबराकर भागना किस बात का ।।

Author
Neelam Ji
मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।
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सच बात है जज़्बात है. हर दिन एक, शुरुवात है. @डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज' अधिवक्ता/साहित्यकार सर्वाधिकार सुरक्षित