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मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

June 14, 2017

दर्द के दामन में चाहत के कमल खिलते हैं!
अश्क की लकीर पर यादों के कदम चलते हैं!
रेंगते ख्यालों में नजर आती हैं मंजिलें,
जब भी निगाहों में ख्वाबों के दिये जलते हैं!

मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

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Author
MITHILESH RAI
#महादेव
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