पालनहार

मैं खड़ी यहां,तू छिपा कहाँ, ढूंढूं इत उत, पार करो नैया
पालनहार तारनहार कहाँ पतवार ओ जीवन के’ खवैया
कण कण में तुम कहाँ हुए ग़ुम वन पर्वत नदिया साँसों में तुम
इक बार दर्शन दो प्रभुवर चरण पखारूं औ लूँ मैं बलैयां।

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