मुक्तक

गर ये दिल लापता नहीं होता
दर्द का सिलसिला नहीं होता

हम जमाने की क्या खबर रक्खें
मुझको खुद का पता नहीं होता

प्रीतम राठौर भिनगई
श्रावस्ती (उ०प्र०)
%%%%%%%%%%%%%%%%%%%%
? एक शेर ?
????
खिलाते फूल फिर दिल में सितारे तोड़ कर लाते
मेरे दिलबर अगर तुमने कभी हमसे कहा होता
प्रीतम राठौर भिनगई

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मैं रामस्वरूप उपनाम प्रीतम श्रावस्तवी S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत... View full profile
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