कविता · Reading time: 1 minute

तोल-मोल

तोल-मोल के बोल ये दुनिया गोल-मोल
हंसी उड़ाये पल में देगी पोल खोल
शब्दों पर अंकुश हो संशय हो न कोई
वाणी वचनामृत में सुधारस घोल-घोल

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