May 16, 2016 · कविता

तोल-मोल

तोल-मोल के बोल ये दुनिया गोल-मोल
हंसी उड़ाये पल में देगी पोल खोल
शब्दों पर अंकुश हो संशय हो न कोई
वाणी वचनामृत में सुधारस घोल-घोल

1 Comment · 27 Views
poet and story writer
You may also like: