मुक्तक · Reading time: 1 minute

पिया परदेस

कुछ तपन मन में और कुछ बातें अनकही
कहूँ किसे पिया परदेस यही सोच रही
लिखूं मैं कोरे कागज़ पर मन की बातें
वो भी पढ़े विरह में, मैंने क्या-क्या सही

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