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मुक्तक

Govind Kurmi

Govind Kurmi

मुक्तक

April 25, 2017

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तड़प ऐ इश्क की दिल से कही नहीं जाती
चंद कदमों की दूरी भी अब सही नहीं जाती
इक तलब महबूब की और जमाने की बंदिशें
बेकाबू है ये जान अब सीने में रही नहीं जाती

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Author
Govind Kurmi
गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।
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