.
Skip to content

मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

April 21, 2017

तेरी चाहत मेरे गुनाह जैसी है!
तेरी चाहत दर्द की आह जैसी है!
आँखों में आहट है ख्वाबों की लेकिन,
तेरी चाहत सितम की राह जैसी है!

मुक्तककार- #महादेव'(22)

Author
MITHILESH RAI
Recommended Posts
मुक्तक
तेरी यादों की तन्हाई से डर जाता हूँ! तेरी चाहत की परछाई से डर जाता हूँ! टूट गये हैं ख्वाब सभी तेरी रुसवाई से, तेरी... Read more
मुक्तक
तेरी याद से खुद को आजाद करूँ कैसे? तेरी चाहत में खुद को बरबाद करूँ कैसे? लब्ज भी खामोश हैं बेबसी की राहों में, तेरी... Read more
मुक्तक
तेरी चाहत दिल में हरदम रहेगी! करवटें तन्हाई की हरदम सहेगी! बेशुमार गम हैं तेरी बेरुखी के, तेरी याद अश्कों से हरदम बहेगी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मुक्तक
तेरी यादों के कदम रुक नहीं पाते! तेरी जुल्फों के सितम रुक नहीं पाते! रोशनी उम्मीद की रहेगी कबतलक? तेरी चाहत के वहम रुक नहीं... Read more