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मुक्तक

Govind Kurmi

Govind Kurmi

मुक्तक

April 20, 2017

इश्क रोकर सींचे तो क्या, मतलबी दुनिया बंजर है

मासूमियत चेहरे पे तो क्या, नफरतों का ही मंजर है

यहां बस दिल के बदले में दर्द ऐ दिल ही मिलना है

दिखावे की वफ़ा तो क्या, छुपा जब दिल में खंजर है

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Author
Govind Kurmi
गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।

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