.
Skip to content

मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

April 14, 2017

उठती नजर में तेरा चेहरा नजर आता है!
मुझपर तेरे प्यार का पहरा नजर आता है!
ख्वाबों के दायरे में ठहर जाती है जिन्दगी,
ख्वाहिशों का हर आलम गहरा नजर आता है!

मुक्तककार- #महादेव’

Author
MITHILESH RAI
Recommended Posts
मुक्तक
तेरा ख्याल जब भी बार-बार आता है! दिल में बेचैनी का किरदार आता है! बेताब नजर से लिपट जाती हैं यादें, तेरी गुफ्तगूं का इंतजार... Read more
मुक्तक
चेहरा तेरे हाथ की हल्की सी थपकी भी हो,गहरा असर आता है अब भी कई बार रोटी में,तेरे हाथों का स्वाद उतर आता है दुनिया... Read more
मुक्तक
तेरा कमाल आज भी नहीं जाता! तेरे बगैर कुछ नजर नहीं आता! छायी हुई है बेखुदी ख्यालों में, तेरे सिवा कोई भी नहीं भाता! #महादेव_की_कविताऐं'(20)
==* समशान नजर आता है *== (गजल)
जर्रा-जर्रा इस घर का समशान नजर आता है दर-दिवार से आंगन सुनसान नजर आता है ! जी रहा हूँ मगर बेख़ौफ़ मैं रोज इस घर... Read more