मुक्तक · Reading time: 1 minute

खट्टे-मीठे

खट्टे-मीठे अनुभवों को आत्मसात रख
कुछ कडुवा भी मिले यदि मैले न जज़्बात रख
दिल को न अंगार बना,संयम बहुत ज़रूरी
शांतिपूर्वक सामने आकर अपनी बात रख।

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