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मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

March 17, 2017

हम हँसते हुए जीते हैं कभी रोते भी!
हम मंजिल को पाते हैं कभी खोते भी!
कभी मिल जाती है हर खुशी तकदीर से,
कभी जिन्द़गी को अश्क हैं भिगोते भी!

मुक्तककार #महादेव’ (23)

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Author
MITHILESH RAI
#महादेव
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