May 11, 2021 · मुक्तक
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मुक्तक

दरख़्त ये तुमने काटे है,
बचा सको तो बचाओ,कोई राब रख।
तड़प रहीं जिंदगियाँ,
अब एक एक सांस का हिसाब रख।।@निल

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अनिल अहिरवार
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साधारण सी लेखनी हूं, शिक्षा का छोटा सा दीप, जो डटा हुआ है, हवा के... View full profile
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