मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुक्तक

दो दिल के दरमियान ये नफरत ही मिलाते,
मजहब के नाम पर हमें आपस में लड़ाते।
मक्कार बड़े हैं सफेदपोश वतन के,
ये जब भी चाहें बस्तियों में आग लगाते।।
✍️विपिन शर्मा

1 Like · 39 Views
Like
You may also like:
Loading...