तदबीर इक सोना

धरो मत हाथ पर यूं हाथ, है तदबीर इक सोना
मलोगे हाथ फिर तुम ही, रहेगा व्यर्थ का रोना
करो तुम कर्म साहस से,बनो कर्मठ अरे मानव
मिलेगा फल तुम्हें मीठा, दुखों के बीज मत बोना।

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poet and story writer
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