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मुक्तक

Apr 13, 2020 01:45 AM

हर मोड़ पे कोई न कोई हम से ख़फ़ा है
ऐसा लगता है
सभी वफ़ा के पुतले में हमीं इक बेवफ़ा हैं
~ सिद्धार्थ
2.
बड़ी देर तक ताकती रही तुझ को
फिर कहा … अब चलती हुं
जा के अपने जख्मों को सिलती हूं
~ पुर्दिल सिद्धार्थ

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Mugdha shiddharth
Mugdha shiddharth
Bhilai
841 Posts · 12.1k Views
मुझे लिखना और पढ़ना बेहद पसंद है ; तो क्यूँ न कुछ अलग किया जाय......
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