मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुक्तक

कितने मरे हिसाब तुझे दे रहा हूँ
गमगीन आफताब तुझे दे रहा हूँ

जब ग्लानि से हृदय यह तेरा कराहता
पीने को तब शराब तुझे दे रहा हूँ मैं

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