मुक्तक · Reading time: 1 minute

कर्म योद्धा

मुश्किलों को देख कर भी वीर घबराते नहीं।
चल पड़े जिस राह पर फिर, लौट कर आते नहीं।
कर्म योद्धा जो बना सब,यत्न से हासिल करें-
मंजिलों को चूमकर वो, गर्व दिखलाते नहीं।
-लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली

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