मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुक्तक

छलका छलका एक समन्दर आँखों में,
टूटे ख्वाबों का हर मंज़र आँखों में।
बेगानेपन से घायल दिल को करता,
एक नुकीला चुभता खंज़र आँखों में।

दीपशिखा सागर-

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