मुक्तक

१.
कुछ गम कुछ खुशियां तेरे दामन में वो टांक गया
उम्र था कि एक और साल चुपके से फलाँग गया !
…सिद्धार्थ
२.
हम दोनों एक ही माँ की जाई हैं
एक दूजे की हम तो परछाईं हैं !
…सिद्धार्थ
३.
मैं मुह पे रख कर हांथ चुप का समंदर पार तो कर लेती
मुड़ के देखा तो…
एक चिरईया नोची जा रही थी…चीखना लाज़मी था
…सिद्धार्थ

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