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मुक्तक

१.
उसने सारे शब्द गुमा दिए थे
इस लिए नाव भेजी है ढूंढ़ के लाने को
मेरे सुने आंगन को शब्दों से महकाने को
… सिद्धार्थ
२.
भगत तेरा हंस के फांसी पे चढ़ना बेमानी हो गया
तेरे बाद भी जात धर्म, इंसानों से ऊपर रह गया।
…सिद्धार्थ

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मुझे लिखना और पढ़ना बेहद पसंद है ; तो क्यूँ न कुछ अलग किया जाय... लड़ने के लिए तलवार नही कलम को हथियार किया जाय थूक से इतिहास नही लिखा…
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