मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुक्तक

ऊँच-नीच की दीवारें ना धर्मो का कोई पंगा हो
मंदिर-मस्जिद गुरुद्वारों की सदा ही शान तिरंगा हो,
मेरे भारत की यह सुंदरता और एकता बनी रहे,
मज़हब के नामों पर ना कोई दहशत ना ही दंगा हो

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