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मुक्तक

MITHILESH RAI

MITHILESH RAI

मुक्तक

February 3, 2017

तेरा नाम लेकर तन्हाई मिल जाती है!
तेरा दर्द बनकर रुसवाई मिल जाती है!
शामों-सहर भटकता हूँ मैं तेरे लिए मगर,
मेरी जिन्द़गी को जुदाई मिल जाती है!

#महादेव_की_कविताऐं'(25)

Author
MITHILESH RAI
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